सफाई व्यवस्था सुधार में भोपाल को 46.32% अंक, इंदौर से लगभग आधे
भोपाल. शहर में इस बार सफाई व्यवस्था में ऐसा कोई खास बदलाव नहीं आया जिसके आधार पर भोपाल कोई बड़ा दावा कर सके। कुल पांच हजार अंकों के सर्वे में से 25 प्रतिशत यानी 1250 अंक शहर में सफाई व्यवस्था में सुधार के दावे के हैं और इतने ही यानी 25 प्रतिशत नंबर पब्लिक फीडबैक के हैं। सफाई व्यवस्था के सुधार के 1250 अंकों में भोपाल को केवल 579 नंबर (46.32 प्रतिशत) मिले हैं, जबकि इंदौर हम से कहीं आगे है। इंदौर को इस कैटेगरी में 1108 (88.64 प्रतिशत) नंबर मिले हैं।
अंकों का यह निर्धारण नगर निगम द्वारा 15 दिसंबर 2018 तक स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों के आधार पर किया गया है। पब्लिक फीडबैक में भी हम पिछड़ते नजर आ रहे हैं। हालांकि सर्वे के लिए अभी 5 दिन (31 जनवरी)बाकी हैं। लेकिन इतने कम समय में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कम ही है।
दो साल से सफाई में दूसरे नंबर पर बरकरार भोपाल इस बार पिछड़ता नजर आ रहा है। इस साल कुल 5000 अंकों के सर्वे में सफाई व्यवस्था में सुधार और पब्लिक फीडबैक के 2500 अंक हैं। इन दोनों में ही हालत खराब है। ऐसे में नंबर दो का तमगा बरकरार रखना मुश्किल होगा।
सेल्फ असेसमेंट ऐसे पिछड़ रहा है भोपाल
कचरा कलेक्शन व ट्रांसपोर्टेशन के 338 अंक हैं। इनमें भोपाल को सिर्फ 45 मिले हैं। वह भी 100% डोर टू डोर कलेक्शन का दावा करने के बाद।
भानपुर खंती के रेमेडिशन का काम चल रहा है, लेकिन सर्वे के मापदंडों के आधार पर इसके हमें 40 में से केवल 10 ही अंक मिल पाए हैं।
आदमपुर छावनी में नई कचरा खंती बनने का काम धीमी गति से चलने का नतीजा यह है कि हमें 50 में से केवल 25 नंबर ही मिले हैं।
नगर निगम के अपर आयुक्त से लेकर कामगारों तक को एसबीएम पोर्टल पर ई- कोर्स के 19 अंकों में से हमें केवल 4 अंक मिले हैं।
4 कैटेगरी, प्रत्येक के 1250 अंक
सेवा स्तर प्रगति (नगर निगम द्वारा दिए सेल्फ एसेसमेंट डेटा के अनुसार)
प्रमाणीकरण सेवन स्टार रेटिंग व ओडीएफ डबल प्लस ( केंद्र द्वारा सर्वे)
प्रत्यक्ष अवलोकन शहर में सफाई व्यवस्था के दावे पर तीसरी टीम का सर्वे
पब्लिक फीडबैक शहर की न्यूनतम 0.1% आबादी से निर्धारित 7 सवालों के आधार पर
फीडबैक में 13वें नंबर पर
21 जनवरी तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इंदौर में अब तक 1,15,092 लोगों ने अपना फीडबैक दिया है, जबकि भोपाल में यह आंकड़ा केवल 12,053 है। इस तरह इंदौर नंबर-1 पर है जबकि भोपाल का 13वां नंबर है।
पिछड़ने की वजह
2017 और 2018 में पब्लिक फीडबैक के लिए तत्कालीन निगम आयुक्तों ने खास मेहनत की थी। मेयर आलोक शर्मा ने स्कूल -कॉलेजों में स्वच्छता की क्लास लगाई, चाय पर चर्चा की। लेकिन इस बार चाय पर चर्चा के केवल दो आयोजन हुए। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में निगमायुक्त बने बी विजय दत्ता को अचानक अवकाश पर जाना पड़ा।
No comments:
Post a Comment